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धर्म की स्थापना हेतु प्रभु धरा पर अवतरित होते हैं : आस्था भारती ​
(Yogesh Gautam) Dainikkhabre.com Wednesday,14 July , 2021)

New Delhi News, 14 July 2021 ; दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली मे अद्भुत व दिव्य‘श्रीमद्भागवत्कथा’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का प्रसारण यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया जा रहा है तथा देश-विदेश से प्रभु के भक्त-श्रद्धालुगण अपने घरों में ही बैठ कर इस कथा का लाभ प्राप्त कर पा रहे है। यह वर्चुअल व ऑनलाइन कथा कोरोना काल में भक्तों के लिए सकारात्मक ऊर्जा ले कर आ रही है। 16 जुलाई तक सभी इस कथा का आनंद उठा सकते है।कथा के पंचम दिवस भगवान श्री कृष्ण की अनन्त लीलाओं के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्योंको कथा प्रसंगों के माध्यम से उजागर करते हुए परम पूजनीय सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या भागवत भास्कर महामनस्विनी विदुषी सुश्री आस्था भारती जी ने मथुरा गमन (मथुरा में तारनहार का अभिवादन) तथा मथुरा में भगवान कीअनंत लीलाएँ एवं कंस वध जैसे प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
कथा व्यास साध्वी आस्था भारती जी ने श्रीकृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियों की विरह वेदना का हदय विदारक वर्णन किया। प्रेम बाहरी नहीं आंतरिक अवस्था है। श्री कृष्ण ने गोपियों को उनके घट में ही अपने ईश्वरीय रुप का दर्शन करवाया था। इसी कारण से उनकी हृदय तारें श्रीकृष्ण से जुड़ी थीं। तभी वह कण-2 में अपने कान्हा का दर्शन किया करती थीं। भोली-भाली गोपियाँ जिन्हें विद्वानों की भाषा का तनिक भी ज्ञान नहीं था, प्रेम की पराकाष्ठा को छू गई तो दूसरी ओर विद्वान उद्धव प्रेम के पाठ को नहीं समझ पाए। प्रेम विद्वानोंकी पोथियों में नहीं अपितु भक्तों के भावों में स्वयं ही प्रदर्शित होता है। इसलिए हर युग मे जब-जब भी वह परमात्मा आए, प्रेम के पुजारियों ने उन्हें सहजता से पहचान लिया। केवट, शबरी जैसे भक्त इसका स्पष्ट उदाहरण हैं।
अंत में साध्वी जी ने ‘कंस वध’ प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब-जब भी धरा पर आसुरी प्रवृतियाँ हाहाकार मचाती हैं, तब-तब प्रभु अवतार धारण करते हैं। स्वयं प्रभु श्री कृष्ण उद्घोष करते हैं-यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।द्वापर काल में जब कंस के अत्याचारों से धरती त्राहिमाम् कर उठी तो धर्म की स्थापना और भक्तों के कल्याण के लिए परमात्मा का श्री कृष्ण के रूप में अवतरण हुआ। इसी प्रकार वह ईश्वर हर युग, हर काल में साकार रूप धारण कर व्यक्ति के भीतर ईश्वर को प्रकट करते है। भीतर की आसुरी प्रवृत्तियों का नाश कर परम सुख और आनन्द का बोध कराते है और तब अधर्म पर धर्म की विजय का शंखनाद गुंजायमान हो उठता है।प्रभु की प्रत्येक लीला में आध्यात्मिक रहस्य छिपा होता है, जिनका उद्देश्य मनुष्य को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करना है। जब एक मनुष्य पूर्ण सतगुरु की कृपा से ब्रह्मज्ञान को प्राप्त करता है तब उसके अंतर में ही इन लीलाओं में छिपे आध्यात्मिक रहस्य प्रकट होते हैं तथा पूर्ण सतगुरु की कृपा से ही वह इन रहस्यों को समझ पाता है। इसके अतिरिक्त विदुषी जी ने अपने विचारों में संस्थान के बारे में बताते हुए कहा कि संस्थान आज सामाजिक चेतना व जन जाग्रति हेतु आध्यात्मिकता का प्रचार व प्रसार कर रही है। इस भव्य कथा द्वारा श्रद्धालुगण 16 जुलाई तक प्रभु के अनेक रूपों और लीलाओं का आनंद लेते हुए अपने जीवन को लाभान्वित कर पायेंगे। कथा का विशेष प्रसारण संस्थान के यूट्यूब चैनल पर किया जा रहा है। इस लिंक पर जाकर आप कथा का online वेबकास्ट अवश्य देखें:https://www.youtube.com/djjsworld।प्रसारण का समय प्रातः10 से दोपहर1 बजे तक तथा सायं 7 से रात्रि 10 बजे तक है।

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