HARYANA

जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है किसान, सरकार ने ख़ुद किया सड़क पर आने के लिए मजबूर :  हुड्डा
(Yogesh Gautam) Dainikkhabre.com Thursday,10 September , 2020)

Chandigarh News 10 Sep 2020 ; पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कुरुक्षेत्र के पीपली में होने वाली किसान रैली में जा रहे किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर आक्रोश जाहिर किया है हुड्डा का कहना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को लठतंत्र से दबाया नहीं जा सकता लोकतंत्र में हर किसी को अपनी आवाज उठाने और कहीं भी जाने का अधिकार है वो ख़ुद शुक्रवार को पिपली कुरुक्षेत्र जाएंगे और किसान, मजदूर और आढ़तियों से मुलाकात करेंगे।अन्नदाता अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं कोरोना काल में किसान विरोधी ३ अध्यादेश लाकर सरकार ने ख़ुद किसान को सड़क पर आने के लिए मजबूर किया है बिना सदन में चर्चा और रूस्क्क की गारंटी के कोई भी अध्यादेश किसानहित में नहीं हो सकता अगर सरकार व्यवस्था में कोई परिवर्तन करना चाहती है तो उसे मंडी और रूस्क्क व्यवस्था के संरक्षण की गारंटी देनी होगी बीजेपी को अपने वादे के मुताबिक़ लागत और स्वामीनाथन के सी२ फार्मूले पर रूस्क्क देनी होगी नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार कोरोना का हवाला देकर किसान की आवाज दबाना चाहती है लेकिन वो इसी कोरोना काल में किसानों पर ३ अध्यादेश थोप रही है अगर उसे किसान और कोरोना की इतनी ही चिंता है तो वो ३ अध्यादेशों को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है। एक तरफ बीजेपी जेजेपी गठबंधन सरकार किसानों को चैतरफा मार मारने में लगी है और दूसरी तरफ वो किसान को रोने भी नहीं देती किसान जब भी अपने हक़ की आवाज बुलंद करता है तो उसे लाठियों से दबाने की कोशिश की जाती है वीरवार को कुरुक्षेत्र में जो हुआ, वह ना सिर्फ अलोकतांत्रिक बल्कि अमानवीय भी है अन्नदाता १३५ करोड़ भारतीयों का पेट भरता है उसके पेट या शरीर पर लाठी चलाने का अधिकार किसी को नहीं है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कुरुक्षेत्र में हुए आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ व पूर्व मंत्री अरोड़ा और  विधायक मेवासिंह के साथ सैंकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों के साथ गिरफ्तारी भी दी।किसानों के हर आंदोलन और संघर्ष में कांग्रेस उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है किसान विरोधी ३ अध्यादेशों को तब तक लागू नहीं होने दिया जाएगा,जब तक इसमें रूस्क्क की गारंटी शामिल ना हो इसके लिए बेशक सरकार को चैथा अध्यादेश लाना पड़े, जिसमें प्रावधान हो कि रूस्क्क से कम रेट पर ख़रीदने वाली एजेंसी पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो सड़क से लेकर विधानसभा और संसद तक इन अध्यादेशों का विरोध जारी रहेगा। 

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