FARIDABAD

बडखल क्षेत्र में वन विभाग ने ड्रौन तकनीक का प्रयोग करके 5 हेक्टेयर एरियल में की सीडिंग
(Yogesh Gautam) Dainikkhabre.com Wednesday,29 July , 2020)

Faridabad News, 29 July 2020 : वन विभाग द्वारा बुधवार को ड्रौन तकनीक का प्रयोग करते हुये फरीदाबाद वन मण्डल के अधीन बडखल क्षेत्र में 5 हेक्टेयर एरियल सीडिंग के द्वारा पौधारोपण करने का नया प्रयोग किया गया, जिसका शुभारम्भ डा. अमरिन्द्र कौर भा व से, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, (एचओएफएफ) हरियाणा पंचकूला  द्वारा किया गया। अरावली पहाड़ी क्षेत्र में ऐसे बहुत से दुर्गम क्षेत्र हैं, जहां पर आसानी से पहुंच पाना सम्भव नहीं है । इन स्थानों पर मिट्टी तथा पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। इस कार्य हेतु विशेष रूप से डिजाईन किए गए ड्रोन का प्रयोग करते हुए अरावली की पहाडि़यों के अनुकूल स्थानीय प्रजातियों का पौधारोपण करने की योजना को अंजाम दिया गया। यह पूर्णतया ईको-फ्रेंडली तकनीक है, जिसमें न्यूनतम मशीनरी का प्रयोग करके अधिक से अधिक क्षेत्र को हरा-भरा किया जा सकता है ।  एरियल सीडिंग के माध्यम से पौधारोपण करने के लिए स्थानीय प्रजातियों जैसे खैरी, रोंज, बेरी, जंगल जलेबी, इन्द्रजो आदि प्रजातियों के बीजों तथा मिट्टी, खाद, जले हुए कोयले की राख आदि के मिश्रण से सीड बॉल्स तैयार की गई । ड्रोन तकनीक का प्रयोग करके इन सीड बॉल्स का अरावली की पहाडि़यों पर ड्रोन के माध्यम से छिड़काव किया गया। इन सीड बॉल्स की खासियत है कि इनका छिड़काव करने के पश्चात् इन्हें अन्य किसी प्रकार की देखभाल की आवश्यकता नहीं है। इनमें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिश्रित किए गए हैं तथा इन बॉल्स में मौजूद अन्य तत्वों के कारण इन्हें दीमक, चूहों आदि द्वारा नष्ट किए जाने की सम्भावना नहीं ह । बरसात आने पर इन सीड बॉल्स में मौजूद बीजों में फुटाव आएगा तथा बॉल्स में मौजूद पोषक तत्व इन पौधों की प्रारम्भिक वृद्धि में सहायक होंगे।
इसके अतिरिक्त पानी की कमी वाले क्षेत्र में पौधारेपण की सरवाईवल के लिये हाईड्रोजेल तकनीक के इस्तेमाल के प्रयोग का शुभारम्भ भी डा. अमरिन्द्र कौर भा व से, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, (एचओएफएफ) हरियाणा, पंचकूला  किया गया। हाईड्रोजेल एक प्राकृतिक बहुलक है जो अपने भार से  लगभग 400 गुणा तक पानी सोख लेता है। पौधा पानी की कमी को एक लम्बे समय तक सहन कर सकता है। जिसके कारण पौधां में बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं रहती है। इस प्रयोग के अन्तर्गत 540 पौधे लगाये गये। एक प्लाट में 270 गढढों मे रोंज के स्पीसीज के पौधे लगाये गये तथा दूसरे प्लाट के गढढो में कचनार स्पीसीज के पौधे लगाये गये। इसके पश्चात 15 दिन के अन्तराल पर सरवाईल तथा ग्रोथ के डाटा इकठठा लिया जायेगा जिससे प्रयोग के लिये वांछित डाटा इकटठा किया जा सके। डा दिनेश कुमार एफ.आर.आई, देहरादून तथा सुनीता जैन, वन भवन, आईसीएफ आरएफ, नई दिल्ली द्वारा तकनीकी  सहायता दी गई। इस ड्रौन सीडलिंग तथा हाईड्रौजेल तकनीक के प्रयोग के दौरान श्रीमति वास्वी त्यागी, भा व से, मुख्य वन संरक्षक,  गुरूग्राम तथा श्री राजकुमार भा0व0से0 उप वन संरक्षक, फरीदाबाद की उपस्थित रहें। ड्रौन सीडलिंग तथा हाईड्रौजेल तकनीक के प्रयोग से बडखल क्षेत्र में  हरियाली को बढ़ाने में सहयोग मिलेगा। 

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