HARYANA

भाजपा सरकार किसानों को बर्बाद करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी : कुमारी सैलजा
(Yogesh Gautam) Dainikkhabre.com Monday,20 July , 2020)

Chandigarh News, 20 July 2020 : हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को बर्बाद करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। कोरोना महामारी के बीच भाजपा सरकार द्वारा किसानों को बर्बाद करने के लिए एक नया अध्याय लिखा गया है। केंद्र सरकार अभी हाल ही में तीन नए अध्यादेश लेकर आई है, इससे सरकार के कुछ पसंदीदा पूंजीपतियों को लूट की खुली छूट होगी और किसान अपनी फसल बेचने के लिए इन पूंजीपतियों पर निर्भर होंगे। इन कानूनों के जरिए सरकार खेती में निजी क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है जो किसानों के साथ इस सरकार का एक और षड्यंत्र है। 

कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अभी हाल ही में तीन अध्यादेश लाए गए हैं। पहले हर व्यापारी केवल मंडी से ही फसल खरीद सकता था, परंतु अब नए अध्यादेश के मुताबिक उसे इस कानून के तहत मंडी के बाहर से फसल खरीदने की छूट मिल जाएगी। जिससे मंडी में होने वाली प्रतिस्पर्धा और फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य दोनों समाप्त हो जाएंगे। इस कानून से जहां हरियाणा में मंडियां खत्म हो जाएंगी। वहीं किसानों की फसल मंडी में ओने पौने दामों पर बिकेंगी, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा। देश में 85 फीसदी छोटी खेती करने वाले किसान हैं, जिनकी साल भर की पैदावार इतनी नहीं होती कि वह हर बार पास की मंडी तक भी जा सकें और अपनी फसल बेच सकें। ऐसे में किसान अपनी फसल को किसी दूसरे राज्य की मंड़ी में जाकर बेचें, यह कहना किसी मजाक से कम नहीं है। यदि कोई किसान अपनी फसल बेचने के लिए दूसरे राज्य में पहुंच भी जाए, तो इसकी क्या गारंटी है कि उसको फसल के इतने दाम मिल जाएंगे कि माल, ढुलाई सहित पूरी लागत निकल आएगी? 

कुमारी सैलजा ने कहा कि वहीं दूसरे अध्यादेश ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम संसोधन’ के तहत अनाज, दालों, प्याज, आलू इत्यादि को जरूरी वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिया गया है, इनकी स्टॉक सीमा समाप्त कर दी गई है। इससे अत्यधिक स्टॉक करके इन चीजों की कालाबाजारी होगी और महंगे दामों पर इन्हें बेचा जाएगा।  वहीं तीसरे अध्यादेश में कॉन्टैक्ट फार्मिंग के माध्यम से किसानों का वजूद समाप्त करने की साजिश रची गई है। इस कानून के माध्यम से अनुबंध आधारित खेती को वैधानिकता प्रदान की गई है, ताकि बड़े पूंजीपति और कंपनियां अनुबंध के माध्यम से ठेका आधारित खेती कर सकें। किसान खेतीबाड़ी के लिए इनसे बंध जाएगा, जिससे किसानों का वजूद समाप्त हो जाएगा। पूंजीपति और कंपनियां जिस चीज की खेती कराएंगे, किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से ही फसलों का उत्पादन करना पड़ेगा। ऐसा होगा तो किसानों को बीज-खाद से लेकर फसल बेचने तक के लिए इन पर निर्भर रहना पड़ेगा। फसलों के दाम, किसान से कब फसल खरीदी जाएगी, कब भुगतान किया जाएगा, सब कुछ उस पूंजीपति या कंपनी के हाथ में होगा और तरह किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बनकर रह जाएंगे।

कुमारी सैलजा ने कहा कि यह अध्यादेश सरकार द्वारा एक साजिश के तहत लाए गए हैं, पहले ही किसान इस सरकार की षड्यंत्रकारी नीतियों से बेहाल है। किसानों की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होती। फसल खरीद में फर्जीवाड़ा किया जाता है।  फसल बर्बाद होने पर किसानों को मुआवजा तक नहीं दिया जाता। बार- बार जन विरोधी फैसले लेकर किसानों को परेशान किया जाता है। डीजल के दाम असमान छू रहे हैं और अब सरकार के यह अध्यादेश किसानों की बर्बादी के फैसले हैं।

कुमारी सैलजा ने हरियाणा में फसल बीमा महंगा होने पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि अब फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराना भी महंगा हो गया है। जिसकी सीधी मार किसानों पर पड़ेगी। इससे पहले ही तंगहाल स्थिति में किसानों की जेब और ढीली होगी। कपास का प्रीमियम तो तकरीबन ढाई गुना तक बढ़ा दिया गया है। पहले जहां कपास के लिए प्रीमियम राशि प्रति एकड़ पर 620 रुपए थी, वहीं अब यह बढ़ाकर 1650 रुपए कर दी गई है। इस तरह प्रति एकड़ पर कपास का बीमा कराना 1030 रुपए तक बढ़ गया है। वहीं धान पर भी बीमा राशि 630 रुपए प्रति एकड़ थी, वह अब बढ़ाकर 680 रुपए प्रति एकड़ कर दी गई है। इसी तरह अन्य फसलों की प्रीमियम राशि भी बढ़ाई गई है। ऐसा फसल बीमा योजना में हरियाणा सरकार द्वारा दी जाने वाली अपने हिस्से की सब्सिडी को वापस लेने के कारण हुआ है। फसल बीमा योजना के तहत यह वृद्धि सरकार के किसान विरोधी रुख का एक और जीवंत प्रमाण है। क्या इसी तरह से सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी की जाएगी?

कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार के तमाम दावों के बावजूद कर्ज के बोझ तले दबे किसानो की आत्महत्याओं का सिलसिला जारी है। सरकार बिना नीतिगत और ढांचागत कृषि सुधार लागू किए, खोखले नारों व दावों, किसानों की आय दोगुनी करना, जीरो बजट खेती आदि से निरंतर किसानों को गुमराह करती रही है। जिससे आज किसान पूरी तरह से तबाह होने की कगार पर पहुंच चुका है। कुमारी सैलजा ने कहा कि यह नए अध्यादेश एक खास वर्ग के हितों की रक्षा करते हैं। यह अध्यादेश पूरी तरह से किसानों के लिए घाटे का सौदा हैं। इन तीनों अध्यादेशों को तुरंत वापस लिया जाए और पहले की तरह ही सारी व्यवस्था रहने दी जाएं। इसके साथ ही फसल बीमा योजना के तहत बढ़ी प्रीमियम राशि भी तुरंत वापस ली जाए।

Videos

slider by WOWSlider.com v8.6